चंद लब्ज़ों में कैसे कर दूँ तारीफ़ उनकी,
जिनकी यादें जैसे कोई भूलभुलैया सी हैं।
" जाने किस स्टेशन से मिलेगी वो सुकून वाली गाड़ी, उसपर बैठकर मुझे सारा सफर सुकून से गुज़ारना है। "
मैं और तुम
मैं बूँद हूँ तुम नदी , मैं दिन हूँ तुम सदी , मैं रात हूँ तुम चाँदनी , हर श्रृंगार में तुम सादगी , तेरे बिना मैं अधूरा , मेरे बिना भी तुम पूरी।
मैं राह हूँ तुम राही , मैं कलम हूँ तुम स्याही , मैं पतझड़ हूँ तुम सावन , मैं गोकुल तुम वृन्दावन , हैं दूरी अपनी मीलों की , पर प्रेम अपना है सुहावन।
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ख्वाब मिला आज
ख्वाब मिला आज सिरहाने पर मुझे , वह ज़िद्द कर बैठा आज़माने पर मुझे , मैं सोया भी तो आँखें खोलकर, वह भेज रहा था शायद मयखाने पर मुझे।
हर बार मिला देता है एक अजनबी से मुझको , वह ले बैठा है निशाने पर मुझे , मनाता भी नहीं अगर रूठ जाऊं मैं तो , उसको ऐतराज़ है शायद मुस्कुराने पर मुझे।
न कभी साथ रहता है, न ही कभी दूर जाता है , उसकी पूरी कोशिश है कहीं उलझाने पर मुझे , उसको रास नहीं आता दो पल हंसना मेरा , वह खुश है मुझसे ही रूठ जाने पर मुझे। ********************
" टूट जाती है नींद भी अक्सर ख्वाबों के बीच में , कहाँ कोई आता है साथ उम्रभर का लेकर । "
चाकू खंज़र ज़रूरी नहीं अब क़त्ल करने के लिए , अब जानलेवा हो गया है आँखों में उतर जाना किसी का। मैं इशारा जो कर दूँ तो ये आग धधक पड़े , फिर जल गया तो आशियाना किसी का । रईसों की बस्ती में मयखाना नहीं एक भी , फिर भी खाली नहीं है पैमाना किसी का । नशे में बेसुध सब अपनी दास्ताँ बयाँ कर रहे हैं , मैं भी बैठ जाऊँ क्या सुनने अफसाना किसी का । मैं अकेला इस राह पर उन्हें ढूँढू भी तो कैसे , अब काम नहीं आता कुछ भी बतलाना किसी का । समझदार थे कुछ लोग जो लौट गए पिछले ही मोड़ से , वो शायद समझ गए होंगे समझाना किसी का ।
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One Liner
मैं सितारों की भीड़ में कब से उनको ढूँढ रहा था , और वो चाँद बनकर हमको गुमराह करते रहे।
– कुन्दन वर्मा
रख दूँ कहीं छुपाकर तेरी ढेर सारी यादों को, पर हर पल कम्बख्त ये थोड़ी बढ़ सी जाती हैं।
– कुन्दन वर्मा
कुछ बदला-बदला सा है मिज़ाज़ इन हवाओं का, लगता है आज ये उनसे मिलकर आये हैं।